Bageshwar Dham Balaji Kaun Banaya : बागेश्वर धाम बालाजी कौन बनाया?

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Bageshwar Dham Balaji Kaun Banaya: नमस्कार दोस्तों! अगर आप भगवान हनुमान के भक्त हैं या फिर आध्यात्मिक स्थलों की खोज में हमेशा लगे रहते हैं, तो बागेश्वर धाम का नाम तो सुना ही होगा। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में बसा ये धाम आज लाखों श्रद्धालुओं का केंद्र बन चुका है। लेकिन सवाल ये है – बागेश्वर धाम बालाजी कौन बनाया? ये सवाल हर भक्त के मन में कौतुहल जगाता है। आज हम इसी रहस्य को खोलेंगे, धाम के इतिहास, स्थापना और चमत्कारों की कहानी सुनाएंगे। ये लेख न सिर्फ जानकारी देगा, बल्कि आपकी आस्था को भी मजबूत करेगा। चलिए, शुरू करते हैं इस दिव्य यात्रा को! about us

बागेश्वर धाम का प्राचीन इतिहास

बागेश्वर धाम की कहानी सदियों पुरानी है। ये जगह कभी घने जंगलों और जंगली जानवरों से घिरी हुई थी, जहां तपस्वी साधु-संत ध्यान-भजन करते थे। मान्यता है कि यहां स्वयंभू बालाजी (हनुमान जी) प्रकट हुए थे। लेकिन आधुनिक रूप में बागेश्वर धाम बालाजी मंदिर का निर्माण 1887 में हुआ। जी हां, इसे बनवाने वाले थे बाबा सेटू लाल गर्ग – एक सच्चे भक्त और तपस्वी।

बाबा सेटू लाल गर्ग का जन्म छतरपुर के गढ़ा गांव में ही हुआ था। वे बचपन से ही बालाजी के परम भक्त थे। एक बार उन्हें स्वप्न में बालाजी के दर्शन हुए, जहां उन्हें निर्देश मिला कि गांव में एक भव्य मंदिर बनवाएं। इसके बाद उन्होंने अपनी सारी संपत्ति दान कर दी और 1887 में ये मंदिर खड़ा कर दिया। ये मंदिर करीब 300 साल पुरानी परंपरा का प्रतीक है, लेकिन बाबा सेटू लाल ने इसे नया जीवन दिया। आज भी धाम में उनकी समाधि है, जहां श्रद्धालु नमन करते हैं।

  • प्रमुख तथ्य बाबा सेटू लाल गर्ग के बारे में:
    • जन्म: 19वीं सदी के मध्य, गढ़ा गांव।
    • योगदान: मंदिर निर्माण के अलावा, उन्होंने धाम को तंत्र-मंत्र और नकारात्मक ऊर्जा निवारण का केंद्र बनाया।
    • विरासत: उनके पोते पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री आज धाम के पीठाधीश्वर हैं।
    • चमत्कार: मान्यता है कि बाबा सेटू लाल ने कई भूत-प्रेतों का उपचार किया, जो आज भी जारी है।

ये इतिहास बताता है कि बागेश्वर धाम सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था की अमिट कहानी है।

बालाजी मंदिर की स्थापना

बागेश्वर धाम बालाजी कौन बनाया – ये सवाल सीधा बाबा सेटू लाल गर्ग पर आकर ठहरता है। 1887 में निर्मित ये मंदिर हनुमान जी को समर्पित है, जहां स्वयंभू मूर्ति स्थापित है। मंदिर का वास्तुशिल्प सरल लेकिन दिव्य है – लाल पत्थरों से बना, चारों तरफ हरियाली और मंगलवार-शनिवार को विशेष पूजा।

1986 में ग्रामीणों ने इसका जीर्णोद्धार कराया, जिससे ये और भव्य हो गया। लेकिन असली स्थापना का श्रेय बाबा सेटू लाल को ही जाता है। उन्होंने न सिर्फ मंदिर बनवाया, बल्कि नियम भी बनाए – जैसे हर मंगलवार को ‘दिव्य दरबार’ जहां भक्त अपनी ‘अर्जी’ (समस्या पत्र) रखते हैं। ये परंपरा आज भी चल रही है, और लाखों लोग इससे लाभान्वित हो चुके हैं।

मंदिर की विशेषता ये है कि यहां कोई शुल्क नहीं लगता। सब कुछ निःशुल्क – दर्शन, परामर्श, भोजन। ये बाबा सेटू लाल की दानशीलता का प्रमाण है। अगर आप कभी जाएं, तो लाल कपड़े में नारियल बांधकर अर्जी रखना न भूलें!

धीरेंद्र शास्त्री का योगदान

बाबा सेटू लाल गर्ग ने आधार तो रखा, लेकिन पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इसे विश्वव्यापी बना दिया। 1996 में जन्मे धीरेंद्र जी बाबा सेटू लाल के पोते हैं। मात्र 13 साल की उम्र में उन्होंने दीक्षा ली और धाम की कमान संभाली। आज वे ‘बागेश्वर धाम सरकार’ के नाम से प्रसिद्ध हैं।

उनके नेतृत्व में धाम ने नई पहचान पाई:

  • सेवा प्रकल्प: गरीबों के लिए भोजन, शिक्षा और चिकित्सा शिविर।
  • विश्वव्यापी प्रसार: यूट्यूब और सोशल मीडिया से करोड़ों भक्त जुड़े।
  • चमत्कार कथाएं: वे ‘पर्चा’ (दिव्य ज्ञान) के जरिए समस्याओं का समाधान करते हैं, जो वैज्ञानिकों के लिए भी रहस्य है।

धीरेंद्र जी कहते हैं, “बालाजी की कृपा से सब संभव है।” उनके प्रयासों से बागेश्वर धाम अब बुंदेलखंड के 108 आध्यात्मिक केंद्रों में शुमार है।

बागेश्वर धाम की प्रमुख विशेषताएं

बागेश्वर धाम सिर्फ मंदिर नहीं, एक जीवंत आश्रम है। यहां नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है, और सकारात्मकता का संचार। आइए देखें कुछ खास बातें:

विशेषताविवरणमहत्व
स्वयंभू मूर्तिबालाजी की स्वप्रकट मूर्ति, 1887 से स्थापितचमत्कारों का स्रोत
दिव्य दरबारहर मंगलवार को अर्जी प्रस्तुतिसमस्याओं का निवारण
सेवा केंद्रनिःशुल्क भोजनालय, चिकित्सा और शिक्षासामाजिक कल्याण
तपोभूमिप्राचीन जंगल क्षेत्र, तपस्वियों की साधना स्थलीशांति का प्रतीक
पहुंचछतरपुर से 35 किमी, खजुराहो एयरपोर्ट से 60 किमीआसान यात्रा

ये तालिका दर्शाती है कि धाम क्यों लाखों को आकर्षित करता है।

(FAQ)

  1. बागेश्वर धाम बालाजी कौन बनाया? मुख्य रूप से बाबा सेटू लाल गर्ग ने 1887 में निर्माण कराया, जो धाम के संस्थापक थे।
  2. धाम कैसे पहुंचें? ट्रेन से छतरपुर स्टेशन उतरें, वहां से टैक्सी लें। मंगलवार-शनिवार सबसे अच्छा समय।
  3. क्या यहां चमत्कार होते हैं? हां, कई भक्तों ने भूत-प्रेत निवारण और मनोकामना पूर्ति की कहानियां साझा की हैं।
  4. धीरेंद्र शास्त्री कौन हैं? वे बाबा सेटू लाल के पोते और वर्तमान पीठाधीश्वर हैं, जो संतान धर्म का प्रचार करते हैं।
  5. क्या प्रवेश शुल्क है? बिल्कुल नहीं! सब कुछ निःशुल्क।

निष्कर्ष:

दोस्तों, बागेश्वर धाम बालाजी कौन बनाया – ये सवाल हमें बाबा सेटू लाल गर्ग की भक्ति की ओर ले जाता है, जिन्होंने 1887 में ये दिव्य स्थल रचा। आज धीरेंद्र शास्त्री जैसे संतों ने इसे नई ऊर्जा दी है। अगर आप तनाव, नकारात्मकता या कोई समस्या से जूझ रहे हैं, तो एक बार जरूर जाएं। यहां बालाजी महाराज की कृपा से सब ठीक हो जाता है। जय बालाजी! जय हनुमान!

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